रविवार, 22 दिसंबर 2013

उक्ति - 25

ईश्‍वर का होना या न होना भक्ति की शक्ति ही तय करती है।





सोमवार, 2 दिसंबर 2013

उक्ति - 24

अपराध एक व्‍यक्ति करता है और अपराध निरोध कानून सबके लिए बन जाता है। जो व्‍यक्ति जीवनभर किसी वाद-विवाद तक में नहीं पड़ा हो वो अपने ऊपर अपराधरोधी कानून और इसकी चाही-अनचाही प्रक्रियाओं का बोझ कैसे सह सकता है? क्‍या लोकतन्‍त्र में ऐसा होना चाहिए?


शुक्रवार, 29 नवंबर 2013

उक्ति - 23

मानव साथी मानव का उचित मान-सम्‍मान तभी कर सकता है जब वह खुद को भलीभांति समझ चुका हो। क्‍या हम सब खुद को अच्‍छी तरह से समझ सके हैं? यह प्रश्‍न सभी को स्‍वयं से अवश्‍य पूछना चाहिए और हो सके तो इसका ईमानदार उत्‍तर ही दिया जाना चाहिए।

मंगलवार, 19 नवंबर 2013

रविवार, 27 अक्तूबर 2013

उक्ति - 21

गाय, बैल एवं किसान की पूजा-अर्चना सबसे पहले होनी चाहिए क्‍योंकि ये मनुष्‍य जीवन के मुख्‍य आधार हैं।

गुरुवार, 17 अक्तूबर 2013

उक्ति - 20


मानवीय सम्‍बन्‍धों की अन्‍तर्जटिलताओं व अन्‍तर्विरोधों से पीड़ित संवदेनशील व्‍यक्ति मृत्‍यु से पूर्व यदि किसी के प्रति घनघोर रुप से आसक्‍त होता है तो यह है 'प्रकृति' और दुर्भाग्‍य से इसी को मानवजाति नष्‍ट करने पर तुली हुई है।

मंगलवार, 15 अक्तूबर 2013

उक्ति - 19

सही-गलत बात का निर्णय करने के लिए जिस 'सन्‍चेतन हृदय' और 'प्रखर मस्तिष्‍क' की आवश्‍यकता होती है, वह एक 'सच्‍चे' सन्‍त के पास ही हो सकता है।

गुरुवार, 10 अक्तूबर 2013

उक्ति - 18



जीवन एवं मृत्‍यु संसार के दो सबसे बड़े सच हैं। जीवन में हमेशा इससे अवगत रहना चाहिए। यह जीते जी ही अनुभव किया जा सकता है। दुर्भाग्‍य से अधिकांश मानव मौत से ठीक पूर्व ही ये समझ पाते हैं और इसी कारण संसार में अशान्ति है।   

शनिवार, 5 अक्तूबर 2013

उक्ति - 17

नैतिक विचारों के व्‍यावहारिक एकीकरण से ही वर्ग-विभेद, सामाजिक मतभेद मिटाए जा सकते हैं।

गुरुवार, 3 अक्तूबर 2013

उक्ति - 16

नई विचारशक्ति प्राप्‍त करने के लिए मनुष्‍य को समस्‍त पूर्वाग्रहों को आंख मूंद कर स्‍वीकार करने के बजाय इनका व्‍यापक अध्‍ययन, विश्‍लेषण और विवेचन करना चाहिए।

सोमवार, 30 सितंबर 2013

उक्ति - 15

किसी के प्रति आकर्षित होने से पहले लाख बार सोचना चाहिए क्‍योंकि कालान्‍तर में वह हमारी दृष्टि को खटक भी सकता है।

रविवार, 29 सितंबर 2013

उक्ति - 14


लेते हुए संकोच करनेवाला और देते हुए निसंकोच रहनेवाला ही विश्‍वासपात्र हो सकता है।

शनिवार, 28 सितंबर 2013

उक्ति - 13

इसे देश का दुर्भाग्‍य ही कहेंगे कि किसानों की आत्‍महत्‍याएं और सैनिकों के बलिदान भी लोगों को झकझोर नहीं पा रहे हैं।
लेफ्टिनेंट कर्नल विक्रमजीत सिंह के अन्तिम-संस्‍कार
 के समय रोती-बिलखती उनकी प्‍यारी पुत्री

शुक्रवार, 27 सितंबर 2013

उक्ति - 12


वृद्धजनों की झुर्रियों और उनके नि:शक्‍त शरीर को देख कर उनकी उपेक्षा नहीं की जानी चाहिए। बल्कि युवाओं को यह सोच कर उनकी सेवा करनी चाहिए कि कभी वे भी युवा, सुन्‍दर व जवान थे।

बुधवार, 25 सितंबर 2013

उक्ति - 11

विद्वानों, बड़ों का सम्‍मान उनकी जीवनोपयोगी बातों और सिद्धान्‍तों को सदैव व्‍यवहार में बनाए रखने से होता है ना कि तुच्‍छ स्‍वार्थों की पूर्ति हेतु चापलूसों की तरह उनके आगे-पीछे घूमने और मण्‍डराने से।  

शुक्रवार, 20 सितंबर 2013

उक्त्‍िा - 10

मुद्रा को वस्‍तु-विनिमय का माध्‍यम इसलिए बनाया गया ताकि कृषकों, उद्यमियों को उनके परिश्रम का यथोचित मूल्‍य प्राप्‍त हो। इसलिए नहीं कि मुद्रा का मूल्‍य निर्धारण दलाल करने लगें और सारी अर्थव्‍यवस्‍था को ही चौपट कर दें।

बुधवार, 18 सितंबर 2013

उक्ति - 9

जीवन को स्‍वस्‍थ, ऊर्जावान बनाए रखने का सबसे बड़ा स्रोत प्राकृतिक संगीत है। इसे सुनने से किसी वेदांत-ग्रन्‍थ, सन्‍त-महात्‍मा, गुरु के प्रवचनों को सुनने की आवश्‍यकता नहीं रहती।

सोमवार, 16 सितंबर 2013

उक्ति - 8

दु:ख और पीड़ा में जो भावनाएं उभरती हैं, वही भावनाएं सुख के चरमोत्‍कर्ष के दौरान भी होनी चाहिए। तब ही मानवों के मध्‍य मानवोचित संवेदनाएं बनी रहेंगी।

रविवार, 15 सितंबर 2013

उक्ति - 7

कुर्ता-पायजामा, खादी वस्‍त्रधारी अधिकांश नेताओं के भाषण अंग्रेजी भाषा में होते हैं। हम ये भी सुनते-देखते हैं कि राष्‍ट्रपति महोदय धर्म में गहरा विश्‍वास रखते हैं, गृहमन्‍त्री गणेश चतुर्थी के लिए गणेश भगवान की धर्म विधि से पूजा-अर्चना करते हैं, वित्‍त मन्‍त्री धोती पहनते हैं। उदाहरण बहुत हैं बताने को कि धर्मकर्म में अनेक नेता विश्‍वास रखते हैं। परन्तु अपनी भाषा, राजभाषा, राष्‍ट्रीय भाषा हिन्‍दी को स्‍वयं के, भारत के व्‍यवहार में उतारना इन्‍हें पता नहीं क्‍यों अच्‍छा नहीं लगता। इससे अधिक कष्‍टकारी विडम्‍बना इस राष्‍ट्र के लिए और क्‍या हो सकती है?

शनिवार, 14 सितंबर 2013

उक्ति - 6

हिन्‍दी भाषा का उद्धार भारतीय समाज के प्रत्‍येक क्षेत्र में इसे व्‍यावहारिक बना कर ही हो सकेगा, ना कि हिन्‍दी दिवस आयोजित करने से।

शुक्रवार, 13 सितंबर 2013

उक्ति - 5

एक मनुष्‍य लोकतान्त्रिक नियमों-कानूनों की जानकारी न रखने के बावजूद भी जीवन-पर्यन्‍त देश हित में समुचित बना रहता है तथा एक मनुष्‍य लोकतन्‍त्र का नेतृत्‍व करते हुए नियमों-कानूनों को बनाता है और उनके उल्‍लंघन का प्रतिनिधित्‍व भी करता है। क्‍या हमें ऐसा लोकतन्‍त्र चाहिए?

गुरुवार, 12 सितंबर 2013

उक्ति - 4

मनुष्‍य सम्‍पूर्ण ज्ञान केवल दो माध्‍यमों से ग्रहण कर सकता है, ये हैं प्रकृति और एकान्‍त।

बुधवार, 11 सितंबर 2013

उक्ति - 3

समझदार व्‍यक्ति कहावतों, लोकोक्तियों, पुराणों से प्राप्‍त ज्ञान को उपलब्धि नहीं मानते। पुरातन सूक्तियों का समग्र निचोड़, सम्‍पूर्ण ज्ञान समझदार व्‍यक्तियों में स्‍वाभविक रुप से विद्यमान होता है। आवश्‍यकता इसे कालखण्‍ड के अनुरुप प्रयोग करने की, अपने व्‍यवहार में उतारने की होती है। 

सोमवार, 9 सितंबर 2013

रविवार, 8 सितंबर 2013

उक्ति - 1


व्‍यवहार में अनावश्‍यक अभिनय करनेवाला व्‍यक्ति कुछ भी हो सकता है परन्‍तु संवेदनशील और विद्वान कदाचित नहीं हो सकता।