रविवार, 30 नवंबर 2014

उक्ति - 55

व्‍यतीत कभी रिक्‍त नहीं होता, बल्कि उसके ही फलस्‍वरूप वर्तमान में हमारा अस्तित्‍व है। 
29-11-2014, 8-40 रात्रि 

शनिवार, 18 अक्तूबर 2014

उक्ति - 54

अपनी बुराई सहन करनेवालों को दूसरों की बुराई करने का अधिकार नहीं मिल सकता।

रविवार, 3 अगस्त 2014

उक्ति - 52

बड़ी बातें सीखने से पहले छोटी-छोटी बातों को ध्‍यान से देखना, सुनना व उन पर मनन करना सीखना चाहिए। प्राय: इस अभ्‍यास की कमी से सच्‍चे विद्वानों की बड़ी बातों का अनुसरण नहीं हो पाता।

सोमवार, 14 जुलाई 2014

उक्ति - 51

मनुष्‍य अपने जीवन में सबसे बड़ा ज्ञान मृत्‍यु के सत्‍य को याद रखकर ही प्राप्‍त कर सकता है।

सोमवार, 7 जुलाई 2014

उक्ति - 50

आधुनिक संसार में व्‍यक्ति का नहीं उसकी सामाजिक योग्‍यता एवं आर्थिक शक्ति का ही सम्‍मान होता है। व्‍यक्ति का नि:स्‍वार्थ सम्‍मान करनेवाली पारम्‍परिक व्‍यवस्‍था कब की नष्‍ट हो चुकी है।

बुधवार, 18 जून 2014

उक्ति - 49

जिस प्रकार मूर्ख की गम्‍भीरता उसे सम्‍माननीय बना सकती है, उसी प्रकार विद्वान की अति विनोदप्रियता उसे असम्‍माननीय बना सकती है।

सोमवार, 2 जून 2014

उक्ति - 48

चारित्रिक पतन मनुष्‍य को इस योग्‍य भी नहीं छोड़ता कि वह रात को यह याद रख सके कि उसने सुबह कलेवा में क्‍या खाया था।

मंगलवार, 13 मई 2014

उक्ति - 47

बड़े से बड़े कार्य में सफलता तब ही मिल पाती है, जब कार्यकर्त्‍ता कार्य के प्रति एकाग्रचित्‍त रहता है।

सोमवार, 28 अप्रैल 2014

उक्ति - 46

लोग अपनी हरेक बात के अच्‍छे-बुरे पक्ष से परिचित नहीं होते। यह भी कम ही होता है कि प्रत्‍येक व्‍यक्ति द्वारा हर बार अच्‍छी ही बात कही जाए। इसीलिए अच्‍छी बातों के कम व बुरी बातों के अधिक प्रसार के कारण लोगों के बीच जो परस्‍पर विमर्श होता है उससे सद्भावना के बजाय मतभेद अधिक उत्‍पन्‍न होते हैं।

गुरुवार, 24 अप्रैल 2014

उक्ति - 45

जीवन का सुख और मृत्‍यु का दुख मानव-जीवन के दो विराट पहलू हैं। वैचारिक स्‍तर पर हमेशा इनसे जुड़े रहना वैश्विक शान्ति के लिए परम आवश्‍यक है।

सोमवार, 21 अप्रैल 2014

उक्ति - 44

किसी के प्रति हमारी सच्‍ची लगन का अर्थ है कि हम जीवन को जीवनभर केवल उसके सकारात्‍मक दृष्टिकोण से ही देखें।

गुरुवार, 17 अप्रैल 2014

उक्ति - 43

जब सब समझदार हैं तो यह निर्णय कौन करेगा‍ कि मूर्ख कौन है? और जब कोई मूर्ख नहीं है तो मानवीय समस्‍याएं क्‍यों हैं?

रविवार, 23 मार्च 2014

उक्ति - 42

हमारा जीवन जिस धुरी में घूमता है, हमें उसे रचनेवाले का सम्‍मान तो करना ही पड़ेगा। और अगर यह भगवान है तो उस तक पहुंचने के लिए धार्मिक भी बनना ही पड़ेगा।

गुरुवार, 27 फ़रवरी 2014

उक्ति - 40

कुतर्की को लगता है कि उसकी बातें कुतर्क नहीं हैं, पर उसकी बात-विस्‍तार की आकांक्षा उसके लिए कुतर्कों का चयन उसके सोचे बिना ही कर लेती है।

सोमवार, 24 फ़रवरी 2014

शनिवार, 22 फ़रवरी 2014

उक्ति - 38

मनुष्‍य का मनुष्‍य जाति पर सबसे बड़ा उपकार यही होगा कि वह मनुष्‍य को जन्‍म ही न दे।

शुक्रवार, 21 फ़रवरी 2014

उक्ति - 37

हमें ये तो पता होता है कि जीवन में क्‍या करना है, पर ये नहीं पता होता कि क्‍या नहीं करना। और जो नहीं करना चाहिए, जीवन का सारा जोर उसे संभालने में ही लग जाता है।

रविवार, 16 फ़रवरी 2014

उक्ति - 36

वर्तमान भारतीय राजनीति की उथल-पुथल में मतदाता की ''वंदे मातरम्'' तटस्‍थता पर ही भारत का भविष्‍य निर्भर करेगा। विचलित होने के लिए बहुत से पड़ाव आएंगे, पर मतदाता को स्‍वयं से पूछ कर ही मतदान करना होगा। 

रविवार, 9 फ़रवरी 2014

उक्ति - 35

मूल्‍यहीन मूल्‍यांकनकर्त्‍ताओं द्वारा शासित राष्‍ट्र में किसी कार्य हेतु प्रसिदि्ध, लोकप्रियता, पुरस्‍कार, पदोन्‍नति की अपेक्षा मूर्खता है।

शनिवार, 8 फ़रवरी 2014

उक्ति - 34

वस्‍तु उत्‍पादन और उपभोग प्रणाली पर केन्द्रित संसार में भ्रष्‍टाचार कभी समाप्‍त नहीं हो सकता। हां उसका स्‍तर छोटा-बड़ा अवश्‍य हो सकता है।

बुधवार, 5 फ़रवरी 2014

उक्ति - 33

मनुष्‍य के जीवन में किसी भी परिस्थिति में जो डर होता है वह उसके आत्‍मविश्‍वास की कमी के कारण ही होता है।

सोमवार, 3 फ़रवरी 2014

उक्ति - 32

प्रशंसा तो दुश्‍मन भी करते हैं, पर वे उसका वाचन या प्रदर्शन नहीं करते।

शनिवार, 1 फ़रवरी 2014

उक्ति - 31

मनुष्‍य की भौतिक महत्‍वाकांक्षाएं उसके जीवन से ज्‍यादा बड़ी नहीं होनी चाहिए।

रविवार, 26 जनवरी 2014

उक्ति - 30

हमें अपनी विचारदृष्टि को प्रतिदिन परखना चाहिए और यहां की संकीर्णता को कुछ देर के लिए अलग रख देना चाहिए। यदि यह अभ्‍यास नि‍यमित हो तो निश्चित ही एक नए जीवन का अनुभव होगा।

शनिवार, 25 जनवरी 2014

उक्ति - 29

यदि स्‍वयं को दूसरे की दृष्टि से देखने का अवसर मिले तो यही पाएंगे कि हमारा अस्तित्‍व कुछ नहीं है। तब अहं का चकनाचूर होना अवश्‍यंभावी है।

शुक्रवार, 24 जनवरी 2014

उक्ति - 28

दूसरे को समझाने-बुझाने के लिए सभी बुदि्धमान होते हैं, पर स्‍वयं को समझा-बुझा सकनेवाले विद्वान कम ही होते हैं।

शुक्रवार, 17 जनवरी 2014

उक्ति - 27

बड़ी बात और बड़े काम में फर्क होता है। बड़ी बात करनेवाले बड़े काम व बड़े काम करनेवाले बड़ी बात नहीं करते।

सोमवार, 13 जनवरी 2014

उक्ति - 26


एक वयस्‍क व्‍यक्ति द्वारा स्‍वयं के साथ किया जानेवाला संवाद ही सच्‍चा और सफल होता है।