गुरुवार, 27 फ़रवरी 2014

उक्ति - 40

कुतर्की को लगता है कि उसकी बातें कुतर्क नहीं हैं, पर उसकी बात-विस्‍तार की आकांक्षा उसके लिए कुतर्कों का चयन उसके सोचे बिना ही कर लेती है।

सोमवार, 24 फ़रवरी 2014

शनिवार, 22 फ़रवरी 2014

उक्ति - 38

मनुष्‍य का मनुष्‍य जाति पर सबसे बड़ा उपकार यही होगा कि वह मनुष्‍य को जन्‍म ही न दे।

शुक्रवार, 21 फ़रवरी 2014

उक्ति - 37

हमें ये तो पता होता है कि जीवन में क्‍या करना है, पर ये नहीं पता होता कि क्‍या नहीं करना। और जो नहीं करना चाहिए, जीवन का सारा जोर उसे संभालने में ही लग जाता है।

रविवार, 16 फ़रवरी 2014

उक्ति - 36

वर्तमान भारतीय राजनीति की उथल-पुथल में मतदाता की ''वंदे मातरम्'' तटस्‍थता पर ही भारत का भविष्‍य निर्भर करेगा। विचलित होने के लिए बहुत से पड़ाव आएंगे, पर मतदाता को स्‍वयं से पूछ कर ही मतदान करना होगा। 

रविवार, 9 फ़रवरी 2014

उक्ति - 35

मूल्‍यहीन मूल्‍यांकनकर्त्‍ताओं द्वारा शासित राष्‍ट्र में किसी कार्य हेतु प्रसिदि्ध, लोकप्रियता, पुरस्‍कार, पदोन्‍नति की अपेक्षा मूर्खता है।

शनिवार, 8 फ़रवरी 2014

उक्ति - 34

वस्‍तु उत्‍पादन और उपभोग प्रणाली पर केन्द्रित संसार में भ्रष्‍टाचार कभी समाप्‍त नहीं हो सकता। हां उसका स्‍तर छोटा-बड़ा अवश्‍य हो सकता है।

बुधवार, 5 फ़रवरी 2014

उक्ति - 33

मनुष्‍य के जीवन में किसी भी परिस्थिति में जो डर होता है वह उसके आत्‍मविश्‍वास की कमी के कारण ही होता है।

सोमवार, 3 फ़रवरी 2014

उक्ति - 32

प्रशंसा तो दुश्‍मन भी करते हैं, पर वे उसका वाचन या प्रदर्शन नहीं करते।

शनिवार, 1 फ़रवरी 2014

उक्ति - 31

मनुष्‍य की भौतिक महत्‍वाकांक्षाएं उसके जीवन से ज्‍यादा बड़ी नहीं होनी चाहिए।