रविवार, 23 मार्च 2014

उक्ति - 42

हमारा जीवन जिस धुरी में घूमता है, हमें उसे रचनेवाले का सम्‍मान तो करना ही पड़ेगा। और अगर यह भगवान है तो उस तक पहुंचने के लिए धार्मिक भी बनना ही पड़ेगा।