सोमवार, 28 अप्रैल 2014

उक्ति - 46

लोग अपनी हरेक बात के अच्‍छे-बुरे पक्ष से परिचित नहीं होते। यह भी कम ही होता है कि प्रत्‍येक व्‍यक्ति द्वारा हर बार अच्‍छी ही बात कही जाए। इसीलिए अच्‍छी बातों के कम व बुरी बातों के अधिक प्रसार के कारण लोगों के बीच जो परस्‍पर विमर्श होता है उससे सद्भावना के बजाय मतभेद अधिक उत्‍पन्‍न होते हैं।

गुरुवार, 24 अप्रैल 2014

उक्ति - 45

जीवन का सुख और मृत्‍यु का दुख मानव-जीवन के दो विराट पहलू हैं। वैचारिक स्‍तर पर हमेशा इनसे जुड़े रहना वैश्विक शान्ति के लिए परम आवश्‍यक है।

सोमवार, 21 अप्रैल 2014

उक्ति - 44

किसी के प्रति हमारी सच्‍ची लगन का अर्थ है कि हम जीवन को जीवनभर केवल उसके सकारात्‍मक दृष्टिकोण से ही देखें।

गुरुवार, 17 अप्रैल 2014

उक्ति - 43

जब सब समझदार हैं तो यह निर्णय कौन करेगा‍ कि मूर्ख कौन है? और जब कोई मूर्ख नहीं है तो मानवीय समस्‍याएं क्‍यों हैं?