रविवार, 30 नवंबर 2014

उक्ति - 55

व्‍यतीत कभी रिक्‍त नहीं होता, बल्कि उसके ही फलस्‍वरूप वर्तमान में हमारा अस्तित्‍व है। 
29-11-2014, 8-40 रात्रि