मंगलवार, 2 जून 2015

उक्ति - 60


प्रतिशोध और क्रोध के बिना जो भी विचार होगा, वही श्रेष्‍ठ विचार होगा।

6 टिप्‍पणियां:

  1. प्रतिशोध और क्रोध कार्मिक रिएक्शंस को और उग्र बना देते हैं। अक्सर जब दो व्यक्तियों में कहा सुनी होती एक झुकता है। बात को खत्म करने के लिए खेद भी प्रकट करता है। यही पैट्रन चल पड़ता है। कालान्तर में ये हमेशा झुकने वाला व्यक्ति इस इक़ुएशन को बदलने के लिए रिएक्ट करता है। हावी रहने वाला और उग्र होकर प्रतिक्रिया करता है। घटियापन में उससे पहला व्यक्ति जीत नहीं सकता।

    इस स्थिति से निकलने का एक ही उपाय है -आप अपना अटीट्युड बदल लें। बी पॉजिटिव एंड चेंज दी इक़ुएशन फॉर ------------ एवर। कम आउट आफ दी नेट। जयश्री कृष्ण।

    उत्तर देंहटाएं
  2. प्रतिशोध और क्रोध कार्मिक रिएक्शंस को और उग्र बना देते हैं। अक्सर जब दो व्यक्तियों में कहा सुनी होती एक झुकता है। बात को खत्म करने के लिए खेद भी प्रकट करता है। यही पैट्रन चल पड़ता है। कालान्तर में ये हमेशा झुकने वाला व्यक्ति इस इक़ुएशन को बदलने के लिए रिएक्ट करता है। हावी रहने वाला और उग्र होकर प्रतिक्रिया करता है। घटियापन में उससे पहला व्यक्ति जीत नहीं सकता।

    इस स्थिति से निकलने का एक ही उपाय है -आप अपना अटीट्युड बदल लें। बी पॉजिटिव एंड चेंज दी इक़ुएशन फॉर ------------ एवर। कम आउट आफ दी नेट। जयश्री कृष्ण।

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुन्दर व सार्थक प्रस्तुति..
    शुभकामनाएँ।
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

    उत्तर देंहटाएं
  4. सुन्दर व सार्थक रचना प्रस्तुतिकरण के लिए आभार..
    मेरे ब्लॉग की नई पोस्ट पर आपका इंतजार...

    उत्तर देंहटाएं
  5. अर्थ और काम हमारी सारी समस्याओं की वजह बने हुए हैं। काम (वासना किसी भी किस्म की )के पूरे न होने पर क्रोध पैदा होता है। सबसे मुश्किल काम है क्रोध को जीतना।

    उत्तर देंहटाएं
  6. अर्थ और काम हमारी सारी समस्याओं की वजह बने हुए हैं। काम (वासना किसी भी किस्म की )के पूरे न होने पर क्रोध पैदा होता है। सबसे मुश्किल काम है क्रोध को जीतना।

    उत्तर देंहटाएं